क्या गुरुत्वाकर्षण एन्ट्रापी से जन्मा है?

क्या गुरुत्वाकर्षण एन्ट्रापी से जन्मा है?
एक नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विश्लेषण

गुरुत्वाकर्षण को अब तक एक मूलभूत बल माना जाता है—ऐसा बल जो ब्रह्मांड के हर कण को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है, जैसा कि आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता (General Relativity) में समझाया गया है। लेकिन हाल ही में वैज्ञानिक समुदाय में एक नई और क्रांतिकारी सोच उभरकर सामने आई है—क्या यह संभव है कि गुरुत्वाकर्षण एक मौलिक बल न होकर, एन्ट्रापी (Entropy) से उत्पन्न हुआ एक “उदीयमान बल” (Emergent Force) हो?

एन्ट्रापी क्या है?

एन्ट्रापी का शाब्दिक अर्थ होता है ‘अव्यवस्था’ या ‘विकार’। यह एक थर्मोडायनामिक (उष्मागतिक) संकल्पना है जो बताती है कि किसी प्रणाली में ऊर्जा कितनी हद तक समान रूप से वितरित हो गई है। एन्ट्रापी का एक सिद्धांत यह भी है कि ब्रह्मांड निरंतर अधिक अव्यवस्थित या उच्च एन्ट्रापी की अवस्था की ओर बढ़ रहा है।

गिनेस्ट्रा बियानकोनी का नवीन सिद्धांत –

हाल ही में प्रकाशित एक शोधपत्र (Physical Review D, 2025) में फिजिसिस्ट गिनेस्ट्रा बियानकोनी ने प्रस्ताव रखा है कि गुरुत्वाकर्षण वास्तव में क्वांटम रिलेटिव एन्ट्रापी से उत्पन्न होता है। यह एन्ट्रापी दो क्वांटम अवस्थाओं के बीच सूचना में अंतर का माप है। बियानकोनी के अनुसार, द्रव्य (matter) और अंतरिक्ष-काल (spacetime) के दो भिन्न मेट्रिक के बीच जो सूचना भिन्नता होती है, वही गुरुत्वाकर्षण के रूप में प्रकट होती है।

यह मॉडल आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता को एक मौलिक नियम न मानकर एक प्रकार के एन्ट्रापिक संतुलन के रूप में देखता है।

एरिक वर्लिंडे और एंट्रॉपिक ग्रैविटी-

इस विचार की जड़ें एरिक वर्लिंडे के 2009 और 2011 के शोधों में मिलती हैं। वर्लिंडे ने प्रस्तावित किया था कि गुरुत्वाकर्षण सूचना सिद्धांत और थर्मोडायनामिक्स के सिद्धांतों से निकलने वाला एक प्रभाव है। उन्होंने होलोग्राफिक सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसमें यह विचार किया गया कि अंतरिक्ष-काल और गुरुत्वाकर्षण का निर्माण किसी गहराई में मौजूद सूचना से हो सकता है।

वर्लिंडे के मॉडल को मुख्यतः डार्क मैटर से संबंधित जटिलताओं को हल करने की दिशा में देखा गया, विशेषकर आकाशगंगाओं के गुरुत्वीय लेंसिंग प्रोफाइल्स को समझाने में।

नई खोज बनाम पुरानी अवधारणाएँ –

बियानकोनी का सिद्धांत वर्लिंडे की तुलना में अधिक गणितीय और क्वांटम-सापेक्षतावादी पुल प्रदान करता है। इसके तहत यह प्रयास किया गया है कि एन्ट्रापी और क्वांटम सूचना के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण को भौतिक रूप में देखा जा सके। इस मॉडल की एक और विशेषता यह है कि यह परखने योग्य पूर्वानुमान (testable predictions) भी देता है।

आलोचनाएँ और विवाद-

हालांकि, इस विचारधारा को लेकर वैज्ञानिक समुदाय विभाजित है। शान गाओ जैसे समीक्षक मानते हैं कि इस तरह के एनालॉजी थर्मोडायनामिक रूप से असंगत हो सकते हैं। इसके अलावा कई वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या यह मॉडल गुरुत्वाकर्षण की सभी स्थितियों—विशेषकर ब्लैक होल या अत्यधिक गुरुत्वीय क्षेत्रों—में सटीक परिणाम दे सकता है?

क्या इसका भविष्य है?

फिलहाल यह विचार सैद्धांतिक और विवादास्पद है, लेकिन यह ब्रह्मांड को समझने की एक नई खिड़की अवश्य खोलता है। यदि गुरुत्वाकर्षण सच में एन्ट्रापी से उत्पन्न होता है, तो इसका अर्थ यह होगा कि अंतरिक्ष, समय और द्रव्य के मूलभूत संबंधों को हम अब तक जितना समझते आए हैं, वह अधूरा है।

यह खोज न केवल भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों को चुनौती देती है, बल्कि क्वांटम ग्रैविटी (Quantum Gravity) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी हो सकती है। आने वाले वर्षों में यदि इस मॉडल के परखने योग्य परिणाम सही साबित होते हैं, तो यह हमारे ब्रह्मांड की मूल प्रकृति को समझने की दृष्टि से एक क्रांतिकारी मोड़ हो सकता है।

निष्कर्ष:
गुरुत्वाकर्षण को एन्ट्रापी के दृष्टिकोण से देखना एक साहसी विचार है, जो हमें यह सोचने को मजबूर करता है कि क्या यह बल मूलभूत है या ब्रह्मांड की जानकारी-संतुलन की प्रक्रिया का एक प्रकट रूप। विज्ञान की यही विशेषता है—यह हमें मौलिक धारणाओं पर पुनर्विचार करने का साहस देता है।

अगर यह विचार भविष्य में प्रमाणित होता है, तो यह न केवल गुरुत्वाकर्षण को समझने का तरीका बदलेगा, बल्कि यह भी दर्शाएगा कि ब्रह्मांड में सूचना और विकार (entropy) की भूमिका अब तक हमारी कल्पना से कहीं अधिक गहन और व्यापक है।

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