Ashok Tiwari

संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Rick Briggs)

संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Rick Briggs) — NASA के वैज्ञानिक Dr.Rick Briggs के प्रसिद्ध पेपर “Knowledge representation in Sanskrit and Artificial Intelligence” का सारांश प्रस्तुत है, जिसमें विशेष रूप से संस्कृत भाषा की विशेषताएँ और उसकी उपयोगिता को विस्तार से समझाया गया है। (2) स्पष्ट कारक प्रणाली (Case System)संस्कृत में 8 कारक होते हैं: कर्ता […]

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फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन

फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन जब हम “फ्रीक्वेंसी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर विज्ञान की किसी किताब या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की याद आती है। लेकिन यदि थोड़ा ठहरकर देखें, तो महसूस होता है कि फ्रीक्वेंसी केवल एक भौतिक माप नहीं, बल्कि अस्तित्व की एक गहरी, सर्वव्यापी भाषा है। यह वही अदृश्य लय है जो सूक्ष्म

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ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ

ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ भारतीय दर्शन में ईश्वर को केवल एक सर्वशक्तिमान सत्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि चेतना, शक्ति और व्यवस्था के मूल स्रोत के रूप में समझा गया है। वेदांत, उपनिषद, भागवत परंपरा और वैष्णव दर्शन में ईश्वर की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए उनकी शक्तियों का विश्लेषण

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हायर डायमेंशन

उच्च-आयामी (Higher-Dimensional) स्थानों की समझ और उनके भौतिक निहितार्थ हम जिस दुनिया का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं, वह तीन स्थानिक आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय आयाम से बनी प्रतीत होती है। लेकिन आधुनिक भौतिकी यह संकेत देती है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। उच्च-आयामी स्थानों की अवधारणा इसी जटिलता

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ध्यान

ध्यान को एक ऐसे आगंतुक के रूप में प्रतिपादित किया जा सकता है, जिसकी उपस्थिति को प्रत्यक्षतः नियंत्रित नहीं किया जा सकता, अपितु जिसके आगमन के लिए केवल आंतरिक अनुकूलता और प्रतीक्षारत सजगता का निर्माण किया जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि ध्यान का अनुभव उन सभी व्यक्तियों के जीवन में घटित होता रहा

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भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय

भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय (Proto-Indo-European, PIE)” को उस आदिम भाषा के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे यूरोप और एशिया की अनेक भाषाएँ विकसित मानी जाती हैं। दूसरी ओर संस्कृत को विश्व की अत्यंत प्राचीन, संरचित और वैज्ञानिक भाषा माना जाता है। कुछ विद्वानों ने यह मत प्रस्तुत किया है कि वास्तव में

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सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion: The Original – Seven Hermetic Principles लेखक Elias Rubenstein हरमेटिक सिद्धांत (Hermetic Principles) एक दार्शनिक-आध्यात्मिक परंपरा है, जिसका संबंध प्राचीन रहस्यवादी ज्ञान से माना जाता है। यह परंपरा मुख्यतः एक प्रतीकात्मक ऋषि-पुरुष Hermes Trismegistus से जोड़ी जाती है, जिन्हें यूनानी देवता Hermes और मिस्र के देवता Thoth का संयुक्त

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वाक मनस संवाद

शतपथ ब्राह्मण में “वाक्–मनस् संवाद” (1/4/5/89/13) शतपथ ब्राह्मण में “वाक् (speech)” और “मनस् (mind)” के बीच एक दार्शनिक संवाद का उल्लेख मिलता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य के ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया में मन और वाणी का क्या संबंध है और कौन अधिक महत्वपूर्ण है। यह संवाद केवल भाषिक या

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गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता

गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता- गणितज्ञानविहीनो यः सर्वशास्त्रेषु पण्डितः।स न पण्डित इत्युक्तो दीपहीनगृहं यथा॥(आर्यभट्टीय)अर्थजो व्यक्ति अन्य शास्त्रों का पण्डित है लेकिन गणित नहीं जानता, वह ऐसा है जैसे दीपक के बिना घर, अर्थात उसका ज्ञान अधूरा है। यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।तद्वद् वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥(भास्कराचार्य कृत सिद्धान्तशिरोमणि (लीलावती), मंगलाचरण)अर्थजैसे मोरों में शिखा और

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निर्णय व अनुभव

जीवन में घटने वाली कोई भी घटना वास्तव में निरर्थक नहीं होती। मनुष्य प्रायः अपने अतीत के कुछ निर्णयों या संबंधों को देखकर यह सोचता है कि उसने अपना समय, ऊर्जा या विश्वास व्यर्थ कर दिया। परंतु दार्शनिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक अनुभव मनुष्य के व्यक्तित्व-निर्माण की एक आवश्यक कड़ी होता है। मनुष्य

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