Religion and Philosophy

महेश्वर सूत्र व कम्प्यूटर विज्ञान

महेश्वर सूत्र व कम्प्यूटर विज्ञान : आज से 2500 वर्ष पूर्व महर्षि पाणिनि द्वारा रचित महेश्वर सूत्र केवल भाषा-विज्ञान नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन में “ध्वनि से सृष्टि” की अवधारणा से जुड़े हैं। महेश्वर सूत्र संकेत देते हैं कि:ध्वनि → शब्दशब्द → ज्ञानज्ञान → चेतनाचेतना → सृष्टि की अनुभूतिअर्थात ध्वनि केवल communication नहीं, बल्कि reality structure […]

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यजुर्वेद में गणितीय चमकम

कृष्ण यजुर्वेद के अंतर्गत आने वाले चमकम् का एकादश अनुवाक अत्यंत प्रसिद्ध है। इसमें साधक अंत में संख्याओं के माध्यम से पूर्णता, समृद्धि, विस्तार और ब्रह्मांडीय संतुलन की कामना करता है। यह अनुवाक इस प्रकार है: “एका च मे तिस्रश्च मे पञ्च च मे सप्त च मे नव च मे ।एकादश च मे त्रयोदश च

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वेदों में “ऋत”

वेदों में “ऋत” : अर्थ, उपयोगिता और दार्शनिक विवेचना वैदिक साहित्य में “ऋत” एक अत्यंत गूढ़ और केंद्रीय दार्शनिक अवधारणा है। यह केवल एक शब्द या धार्मिक विचार नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की व्यवस्था, संतुलन और सत्य का मूल सिद्धांत है। भारतीय दर्शन में जिस प्रकार “ब्रह्म”, “सत्य” और “धर्म” को आधारभूत तत्व माना गया

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फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन

फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन जब हम “फ्रीक्वेंसी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर विज्ञान की किसी किताब या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की याद आती है। लेकिन यदि थोड़ा ठहरकर देखें, तो महसूस होता है कि फ्रीक्वेंसी केवल एक भौतिक माप नहीं, बल्कि अस्तित्व की एक गहरी, सर्वव्यापी भाषा है। यह वही अदृश्य लय है जो सूक्ष्म

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ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ

ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ भारतीय दर्शन में ईश्वर को केवल एक सर्वशक्तिमान सत्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि चेतना, शक्ति और व्यवस्था के मूल स्रोत के रूप में समझा गया है। वेदांत, उपनिषद, भागवत परंपरा और वैष्णव दर्शन में ईश्वर की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए उनकी शक्तियों का विश्लेषण

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हायर डायमेंशन

उच्च-आयामी (Higher-Dimensional) स्थानों की समझ और उनके भौतिक निहितार्थ हम जिस दुनिया का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं, वह तीन स्थानिक आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय आयाम से बनी प्रतीत होती है। लेकिन आधुनिक भौतिकी यह संकेत देती है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। उच्च-आयामी स्थानों की अवधारणा इसी जटिलता

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ध्यान

ध्यान को एक ऐसे आगंतुक के रूप में प्रतिपादित किया जा सकता है, जिसकी उपस्थिति को प्रत्यक्षतः नियंत्रित नहीं किया जा सकता, अपितु जिसके आगमन के लिए केवल आंतरिक अनुकूलता और प्रतीक्षारत सजगता का निर्माण किया जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि ध्यान का अनुभव उन सभी व्यक्तियों के जीवन में घटित होता रहा

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सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion: The Original – Seven Hermetic Principles लेखक Elias Rubenstein हरमेटिक सिद्धांत (Hermetic Principles) एक दार्शनिक-आध्यात्मिक परंपरा है, जिसका संबंध प्राचीन रहस्यवादी ज्ञान से माना जाता है। यह परंपरा मुख्यतः एक प्रतीकात्मक ऋषि-पुरुष Hermes Trismegistus से जोड़ी जाती है, जिन्हें यूनानी देवता Hermes और मिस्र के देवता Thoth का संयुक्त

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वाक मनस संवाद

शतपथ ब्राह्मण में “वाक्–मनस् संवाद” (1/4/5/89/13) शतपथ ब्राह्मण में “वाक् (speech)” और “मनस् (mind)” के बीच एक दार्शनिक संवाद का उल्लेख मिलता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य के ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया में मन और वाणी का क्या संबंध है और कौन अधिक महत्वपूर्ण है। यह संवाद केवल भाषिक या

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महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता

महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर थे। यद्यपि जैन धर्म की मूल शिक्षाएँ आदि तीर्थंकरों द्वारा दी गई थीं, परंतु महावीर स्वामी ने उन सिद्धांतों को एक नई दिशा और स्पष्टता प्रदान की। उन्होंने न केवल जैन दर्शन को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत

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