Science and Technology

क्वांटम कम्प्यूटर व वैदिक गणित

प्रसिद्ध पत्रिका NATURE में प्रकाशित IBM के वैज्ञानिक नूरलल्लाह ज़ाहिद और मोहम्मद मोसलेह की रिपोर्ट- Synthesis of a reversible quantum Vedic multiplier on IBM quantum computers के कुछ बिंदु – डिजिटल परिपथों में गुणा (Multiplication) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। भारतीय वैदिक गणित में वर्णित ऊर्ध्व-तिर्यक्भ्याम् (Urdhva-Tiryakbhyam) सूत्र पर आधारित Vedic Multiplier अपनी गति और […]

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सिंथेटिक AI

क्या वास्तव में Synthetic AI, Artificial Intelligence से आगे है? पिछले कुछ वर्षों में Artificial Intelligence (AI) ने दुनिया को बदल दिया है। लेकिन आज एक नया शब्द तेजी से सुनाई देने लगा है—Synthetic Intelligence (SI)। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आज के अधिकांश AI मॉडल, जैसे बड़े भाषा मॉडल, उपलब्ध डेटा से

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लूप क्वांटम ग्रेविटी (Loop Quantum Gravity – LQG)

समय का चक्र (Cycle of Time) और लूप क्वांटम ग्रेविटी (Loop Quantum Gravity – LQG) आधुनिक भौतिकी और ब्रह्माण्ड विज्ञान के दो ऐसे विचार हैं जो ब्रह्माण्ड की मूल प्रकृति को समझने का प्रयास करते हैं। सामान्यतः हम समय को एक सीधी रेखा की तरह देखते हैं, जिसमें अतीत से वर्तमान और फिर भविष्य की

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महेश्वर सूत्र व कम्प्यूटर विज्ञान

महेश्वर सूत्र व कम्प्यूटर विज्ञान : आज से 2500 वर्ष पूर्व महर्षि पाणिनि द्वारा रचित महेश्वर सूत्र केवल भाषा-विज्ञान नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन में “ध्वनि से सृष्टि” की अवधारणा से जुड़े हैं। महेश्वर सूत्र संकेत देते हैं कि:ध्वनि → शब्दशब्द → ज्ञानज्ञान → चेतनाचेतना → सृष्टि की अनुभूतिअर्थात ध्वनि केवल communication नहीं, बल्कि reality structure

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फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन

फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन जब हम “फ्रीक्वेंसी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर विज्ञान की किसी किताब या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की याद आती है। लेकिन यदि थोड़ा ठहरकर देखें, तो महसूस होता है कि फ्रीक्वेंसी केवल एक भौतिक माप नहीं, बल्कि अस्तित्व की एक गहरी, सर्वव्यापी भाषा है। यह वही अदृश्य लय है जो सूक्ष्म

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हायर डायमेंशन

उच्च-आयामी (Higher-Dimensional) स्थानों की समझ और उनके भौतिक निहितार्थ हम जिस दुनिया का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं, वह तीन स्थानिक आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय आयाम से बनी प्रतीत होती है। लेकिन आधुनिक भौतिकी यह संकेत देती है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। उच्च-आयामी स्थानों की अवधारणा इसी जटिलता

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गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता

गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता- गणितज्ञानविहीनो यः सर्वशास्त्रेषु पण्डितः।स न पण्डित इत्युक्तो दीपहीनगृहं यथा॥(आर्यभट्टीय)अर्थजो व्यक्ति अन्य शास्त्रों का पण्डित है लेकिन गणित नहीं जानता, वह ऐसा है जैसे दीपक के बिना घर, अर्थात उसका ज्ञान अधूरा है। यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।तद्वद् वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥(भास्कराचार्य कृत सिद्धान्तशिरोमणि (लीलावती), मंगलाचरण)अर्थजैसे मोरों में शिखा और

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माइंड मैटर फिजिक्स

Mind–Matter Physics ब्रायन जोसेफसन कौन हैं ? Brian David Josephsonब्रिटेन के प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं। सन 1973 में उन्हें Nobel Prize in Physics मिला। उन्होंने Josephson Effect की खोज की, जो सुपरकंडक्टर भौतिकी में महत्वपूर्ण सिद्धांत है। वे लंबे समय तक University of Cambridge के Cavendish Laboratory में प्रोफेसर रहे। नोबेल पुरस्कार मिलने के

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स्पेस और टाइम (दिक और काल)

स्पेस और टाइम (दिक और काल): “स्थानम् कालः च ब्रह्मणि एव स्थितौ स्तः।”“स्थानकालौ ब्रह्मणि निलीयेताम्।” (वृहस्पतिजातक) अर्थात स्थान और काल ब्रह्म के अंदर ही समाविष्ट हैं । आधुनिक भौतिकी में स्पेस-टाइम (दिक-काल) एक ऐसा ढाँचा है जिसमें स्थान और समय दो अलग-अलग चीजें नहीं मानी जातीं, बल्कि एक ही संयुक्त सत्ता के रूप में समझी

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अनुभव और क्वांटम फील्ड सिद्धांत

क्वांटम फील्ड थ्योरी (QFT) के स्तर पर हर चीज़ को ऊर्जा और फील्ड के रूप में समझा जाता है। इलेक्ट्रॉन्स, फोटॉन्स, यहां तक कि “खाली” स्पेस भी क्वांटम फील्ड की हलचलों से भरा है। अब जब लोग कहते हैं कि हमारे जीवन के अनुभव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर के रूप में मौजूद हैं, तो यह सीधा विज्ञान

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