गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता

गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता-

गणितज्ञानविहीनो यः सर्वशास्त्रेषु पण्डितः।
स न पण्डित इत्युक्तो दीपहीनगृहं यथा॥
(आर्यभट्टीय)
अर्थ
जो व्यक्ति अन्य शास्त्रों का पण्डित है लेकिन गणित नहीं जानता, वह ऐसा है जैसे दीपक के बिना घर, अर्थात उसका ज्ञान अधूरा है।

यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।
तद्वद् वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥
(भास्कराचार्य कृत सिद्धान्तशिरोमणि (लीलावती), मंगलाचरण)
अर्थ
जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि श्रेष्ठ मानी जाती है, उसी प्रकार वेदांग और समस्त शास्त्रों में गणित सर्वोच्च स्थान पर स्थित है।

बहुभिर्विप्रलापैः किं त्रैलोक्ये सचराचरे।
यत्किञ्चिद्वस्तु तत्सर्वं गणितेन विना न हि॥
(भास्कराचार्य, लीलावती (सिद्धान्तशिरोमणि का भाग)
अर्थ
अधिक चर्चा की आवश्यकता ही क्या है? तीनों लोकों में जो भी चर-अचर वस्तु है, वह गणित के बिना समझी नहीं जा सकती।

गणितं मूर्ध्नि सर्वेषां विज्ञानानां प्रतिष्ठितम्।
तेन विना न सिद्ध्यन्ति कार्याणि बहुधा क्वचित्॥
(ब्रह्मभट्ट)
अर्थ
सभी विज्ञानों के शीर्ष पर गणित स्थित है। उसके बिना अनेक प्रकार के कार्य सफल नहीं हो सकते।

यथा सूर्यः प्रकाशेन लोकं व्याप्तं करोति हि।
तथा गणितविद्या हि विज्ञानानि प्रकाशयेत्॥
(मंजुला)
अर्थ
जैसे सूर्य अपने प्रकाश से संसार को प्रकाशित करता है, वैसे ही गणित विद्या अन्य सभी विज्ञानों को प्रकाश देती है, अर्थात उन्हें समझने का आधार बनती है।

आज कंप्यूटर साइंस की हर शाखा के पीछे अलग-अलग प्रकार का गणित काम करता है। जैसे Data Science में probability, statistics और linear algebra मुख्य हैं। उसी प्रकार कम्प्यूटर की अन्य शाखाओं में चित्रानुसार गणित मुख्य भूमिका का निर्वहन करता है।

भारत में शुद्ध गणित पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कई प्रकार की शैक्षणिक, सामाजिक और व्यावसायिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मुख्य समस्याएँ संक्षेप में इस प्रकार हैं:

स्पष्ट कैरियर पथ नही ।
उद्योग जगत में शुद्ध गणित की उपयोगिता के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है।
उच्च स्तर के गणितीय शोध के लिए पर्याप्त संस्थान और संसाधन सीमित हैं।
सामान्यतः यह धारणा बन गई है कि गणित बहुत कठिन और केवल प्रतिभाशाली लोगों के लिए है।
कई विद्यार्थी डर के कारण गणित से दूर हो जाते हैं।
माता-पिता भी अक्सर गणित को केवल इंजीनियरिंग से जोड़कर देखते हैं।
बहुत से छात्र गणित को केवल IIT, SSC, Banking या अन्य परीक्षाओं के दृष्टिकोण से पढ़ते हैं।
इससे विषय की गहराई और रचनात्मकता का विकास कम हो पाता है।

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