Religion and Philosophy

हायर डायमेंशन

उच्च-आयामी (Higher-Dimensional) स्थानों की समझ और उनके भौतिक निहितार्थ हम जिस दुनिया का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं, वह तीन स्थानिक आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय आयाम से बनी प्रतीत होती है। लेकिन आधुनिक भौतिकी यह संकेत देती है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। उच्च-आयामी स्थानों की अवधारणा इसी जटिलता […]

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ध्यान

ध्यान को एक ऐसे आगंतुक के रूप में प्रतिपादित किया जा सकता है, जिसकी उपस्थिति को प्रत्यक्षतः नियंत्रित नहीं किया जा सकता, अपितु जिसके आगमन के लिए केवल आंतरिक अनुकूलता और प्रतीक्षारत सजगता का निर्माण किया जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि ध्यान का अनुभव उन सभी व्यक्तियों के जीवन में घटित होता रहा

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सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion: The Original – Seven Hermetic Principles लेखक Elias Rubenstein हरमेटिक सिद्धांत (Hermetic Principles) एक दार्शनिक-आध्यात्मिक परंपरा है, जिसका संबंध प्राचीन रहस्यवादी ज्ञान से माना जाता है। यह परंपरा मुख्यतः एक प्रतीकात्मक ऋषि-पुरुष Hermes Trismegistus से जोड़ी जाती है, जिन्हें यूनानी देवता Hermes और मिस्र के देवता Thoth का संयुक्त

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वाक मनस संवाद

शतपथ ब्राह्मण में “वाक्–मनस् संवाद” (1/4/5/89/13) शतपथ ब्राह्मण में “वाक् (speech)” और “मनस् (mind)” के बीच एक दार्शनिक संवाद का उल्लेख मिलता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य के ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया में मन और वाणी का क्या संबंध है और कौन अधिक महत्वपूर्ण है। यह संवाद केवल भाषिक या

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महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता

महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर थे। यद्यपि जैन धर्म की मूल शिक्षाएँ आदि तीर्थंकरों द्वारा दी गई थीं, परंतु महावीर स्वामी ने उन सिद्धांतों को एक नई दिशा और स्पष्टता प्रदान की। उन्होंने न केवल जैन दर्शन को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत

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संस्कृत भाषा की विशेषता- 1

संस्कृत भाषा के विद्यार्थी के रूप में मुझे यह अनुभव हुआ कि वास्तव में, संस्कृत केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना को ऊर्ध्वगामी बनाने का एक सशक्त साधन है। “संस्कृत भाषा, मानव चेतना को ऊपर उठाने की भाषा है”—यह विचार भारतीय ज्ञान परंपरा के गहरे अनुभव से उपजा है। संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता

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वाणी के चार स्तर

जो आप बोलते हैं आपकी वाणी (वाक्) के चार स्तर: वैखरी, मध्यमा, पश्यन्ती और परा होते हैं भारतीय दर्शन में वाणी को केवल बोलने की क्रिया नहीं माना गया है, बल्कि उसे चेतना की गहरी प्रक्रिया के रूप में समझा गया है। शब्द बाहर निकलने से पहले कई सूक्ष्म स्तरों से होकर गुजरता है। तंत्र,

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त्रिशूल : एक दार्शनिक विवेचना

त्रिशूल : एक दार्शनिक विवेचना त्रिशूल भगवान शिव का केवल आयुध नहीं है, बल्कि वह भारतीय दार्शनिक चिन्तन का गहन प्रतीक है। यह सृष्टि, जीवन और चेतना के उन मूल सिद्धान्तों को अभिव्यक्त करता है जिन पर वैदिक और शैव दर्शन आधारित है। वेदान्त और सांख्य दर्शन के अनुसार सम्पूर्ण प्रकृति तीन गुणों से बनी

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अर्धचन्द्र (Half Moon)

अर्धचन्द्र (Half Moon): निष्कलुष मन का प्रतीक भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में प्रतीक केवल सौंदर्य या आस्था के उपकरण नहीं हैं, बल्कि वे गहन दार्शनिक अर्थों के संवाहक हैं। अर्धचन्द्र ऐसा ही एक प्रतीक है, जो मन की शुद्धता, संयम और शीतलता का बोध कराता है। अर्धचन्द्र और शिव-तत्त्व महाकवि कालिदास मालविकाग्निमित्रम् में शिव की स्तुति

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हिरण्यगर्भ सू‍त्र

हिरण्यगर्भ सू‍त्र, ब्रह्मवाद और सृष्टि का वैज्ञानिक दृष्टिकोण ऋग्वेद में वर्णित हिरण्यगर्भ सू‍त्र सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में मानव चिंतन का एक अत्यंत सूक्ष्म और दार्शनिक स्वरूप प्रस्तुत करता है। वैदिक द्रष्टा जब कहते हैं — “कष्मय देवाय हविषा विधेमः’ — तो यह केवल देवता को समर्पण नहीं है, बल्कि उस मूल तत्व की

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