Religion and Philosophy

नौ रात्रि व नौ दुर्गा

नौ रात्रि व नौ दुर्गा –  सांख्य  ( सूत्र -रागविराग योग: सृष्टि) के अनुसार प्रकृति, विकृति और आकृति इन तीन का सृष्टिक्रम होता है। पदार्थों में निविष्ट मूल तीन गुणों सत-रज-तमस को आज के विज्ञान के अनुसार पॉजिटिव,  न्यूट्रल और  निगेटिव गुणों के रूप में व्याख्यायित कर सकते है। इन गुणों का आपसी गुणों के […]

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नववर्ष पर

समय के पृष्ठ पर भविष्य का आलेख है- नववर्ष। इसलिए हमें संकल्प की स्याही और कर्म की कलम से समय के पृष्ठ पर सृजन की इबारत लिखना चाहिये। मुंह से निकली हुई बात और हाथ से निकला हुआ समय वापस नहीं आता। अत: उक्ति और युक्ति समय के तराजू पर संतुलित होना चाहिये। वास्तविकता तो

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सहज बनिये, सरल बनिये

यदि आप सरल हैं, सहज हैं, आनंद से भरे हैं तो यह गुण संभाल कर रखिए। और जिनको ऐसे सम्बन्धी, सहकर्मी या मित्र मिले हैं उन्हें सहेज कर रखिए। आप नहीं जानते कि आपके लिए जाने-अनजाने यह अमृत कलश के समान हैं जो तमाम कटुता और दुःख के प्रभाव को मिटाकर आपको प्रेम और शांति 

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शिवरात्रि पर -2

सम्पूर्ण सृष्टि शिव का नृत्य है, सारी सृष्टि चेतना सिर्फ एक चेतना। उस एक बीज, एक चेतना के नृत्य से  सारे विश्व में लाखो हजारों प्रजातियाँ प्रकट हुई हैं| इसलिए यह असीमित सृष्टि शिव का नृत्य है – “शिव तांडव”; वह चेतना जो परमानन्द, मासूम, सर्वव्यापी है और वैराग्य प्रदान करती है, वह शिव है|

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शिवरात्रि पर -1

शिवरात्रि ही क्यों? शिव दिन क्यों नहीं ? रात्रि का अर्थ वह जो आपको अपनी गोद में लेकर सुख और विश्राम प्रदान करे | रात्रि हर बार सुखदायक होती है, सभी गतिविधियां ठहर जाती हैं, सब कुछ स्थिर और शांतिपूर्ण हो जाता है, पर्यावरण शांत हो जाता है, शरीर थकान के कारण निद्रा में चला

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हनुमान जन्मोत्सव पर

हनुमान जी एक कुशल प्रबंधक भी थे। वे मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करना जानते थे। मैनेजमेंट गुरुओं के मुताबिक, रामायण  में ऐसे कई उदाहरण हैं जिससे साबित होता है कि महाबली हनुमान में मैनेजमेंट की जबर्दस्त क्षमता थी।  सही प्लानिंग : श्री हनुमानजी ऊर्जा प्रदान करने वाले शक्ति और समर्पण के पुंज हैं। आज

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श्रीकृष्ण की 16 कलाएं

भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के स्वामी हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्‍वरतुल्य होता है। कुमति, सुमति, विक्षित, मूढ़, क्षित, मूर्च्छित, जाग्रत, चैतन्य, अचेत आदि  शब्दों का संबंध हमारे मन और मस्तिष्क से होता है, जो व्यक्ति मन और मस्तिष्क से अलग रहकर बोध करने लगता

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नीलकंठ धारणी

———बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष चर्चा ——- नीलकंठ धारणी  Nīlakaṇṭha Dhāraṇī नीलकंठ धारणी (नीलकंठ धारा)  एक प्राचीन बौद्ध प्रार्थना है,  जो चीन जापान तिब्बत कोरिया ताइवान आदि के बौद्ध मठों में प्रतिदिन गाई जाती है । यह प्रार्थना भगवान बुद्ध के पूर्वजीवन बोधिसत्व भगवान अवलोकितेश्वर रूप में विद्यमान नीलकंठ भगवान की स्तुति है ।  इस प्रार्थना

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पूजा एवं हवन मंत्र

  पूजा  एवं  हवन मन्त्र            मंगलाचरण – ॐ सच्चिदानंदरूपाय नमोस्तु परमात्मने। ज्योतिर्मय स्वरूपाय विश्वमांगल्य मूर्तये ।। प्रकृतिः पंचभूतानि ग्रहा लोकाः स्वरास्तथा । दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वन्तु मंगलम् ।।   ॐ भद्रम् कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रम् पश्येम अक्षभिः यजत्राःl  स्थिरैः अङ्गैः तुष्टुवांसः तनूभिः विअशेमहि देव-हितम् यदायुः । पवित्रीकरण- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

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कौन है मनु ? क्या है स्मृति ?

  कौन है मनु ? क्या है स्मृति ? खबर है की JNU में ABVP ने मनुस्मृति नामक पुस्तक जला दी l बाबासाहब अम्बेडकर ने भी 27 दिसंबर 1927 को मुंबई में मनुस्मृति जलायी थी l इसके बाद अनेक बार बहुजनों , वामपंथियों , दलित हितचिंतकों , समाजवादियों , प्रगतिवादियों द्वारा मनुस्मृति जलाई जाती रही

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