Religion and Philosophy

शिवत्व

ब्रह्मांड की जो टोटल एटर्नल इंटर्नल एनर्जी है या रैंडमनैस या एंट्रापी है ..आप ग्रे मैटर भी कह सकते हैं , वही शिव है जिसका सिंबोलिक मैनिफैस्टेशन शिवलिंगम् है.. सत्य आराध्य तो है किंतु वह शिवम के साथ संयुक्त होकर ही सुन्दर बन पाता है.. शिवम् = शिव और अहम् । अर्थात मैं शिव हूँ […]

शिवत्व Read More »

नवागुंजारा

भगवान नवागुंजारा Navagunjara : यह कहानी महाभारत से है। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन एक जंगल मे ध्यान योग कर रहे थे। तभी उनके सामने एक अजीब सा जीव आया जो नौ जीवों का मिश्रण था। वो तीन पैरों पर खड़ा था। उसका एक पैर  हाथी का था, दूसरा पैर चीता का औऱ तीसरा घोड़े का और

नवागुंजारा Read More »

नवरात्रि

नवरात्र ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। काली, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-गुण के तीन आयामों के प्रतीक हैं। वे अस्तित्व के तीन मूल गुणों-तमस, रजस और सत्व के भी प्रतीक हैं। तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोड़कर विलीन होना है, पिघलकर

नवरात्रि Read More »

अनाहिता Anahita

अनाहिता Anahita  अनाहिता का अर्थ होता है – किसी का अहित न करने वाली , निर्दोष , बेदाग , सुंदर  देवी के 1008 नामों में एक नाम अनाहिता भी है  सायरस मिस्त्री की दुर्घटनाग्रस्त हुई कार को चला रही महिला का नाम डॉ अनाहिता पंडोले था । मॉडल व टीवी ऐक्ट्रेस अनाहिता भूषण का नाम

अनाहिता Anahita Read More »

हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है ?

एक बड़े नेता बोले है कि हिन्दू शब्द का अर्थ बहुत गंदा है , शर्मनाक है … हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है ? हमें बचपन से पढाया गया है कि प्राचीन ईरानी पारसी व ग्रीक “स“ को “ह“ बोलते थे . इस कारण वे सिन्धु नदी को हिन्दू बोलते थे . उनके  उच्चारण दोष

हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है ? Read More »

नौ रात्रि व नौ दुर्गा

नौ रात्रि व नौ दुर्गा –  सांख्य  ( सूत्र -रागविराग योग: सृष्टि) के अनुसार प्रकृति, विकृति और आकृति इन तीन का सृष्टिक्रम होता है। पदार्थों में निविष्ट मूल तीन गुणों सत-रज-तमस को आज के विज्ञान के अनुसार पॉजिटिव,  न्यूट्रल और  निगेटिव गुणों के रूप में व्याख्यायित कर सकते है। इन गुणों का आपसी गुणों के

नौ रात्रि व नौ दुर्गा Read More »

नववर्ष पर

समय के पृष्ठ पर भविष्य का आलेख है- नववर्ष। इसलिए हमें संकल्प की स्याही और कर्म की कलम से समय के पृष्ठ पर सृजन की इबारत लिखना चाहिये। मुंह से निकली हुई बात और हाथ से निकला हुआ समय वापस नहीं आता। अत: उक्ति और युक्ति समय के तराजू पर संतुलित होना चाहिये। वास्तविकता तो

नववर्ष पर Read More »

सहज बनिये, सरल बनिये

यदि आप सरल हैं, सहज हैं, आनंद से भरे हैं तो यह गुण संभाल कर रखिए। और जिनको ऐसे सम्बन्धी, सहकर्मी या मित्र मिले हैं उन्हें सहेज कर रखिए। आप नहीं जानते कि आपके लिए जाने-अनजाने यह अमृत कलश के समान हैं जो तमाम कटुता और दुःख के प्रभाव को मिटाकर आपको प्रेम और शांति 

सहज बनिये, सरल बनिये Read More »

शिवरात्रि पर -2

सम्पूर्ण सृष्टि शिव का नृत्य है, सारी सृष्टि चेतना सिर्फ एक चेतना। उस एक बीज, एक चेतना के नृत्य से  सारे विश्व में लाखो हजारों प्रजातियाँ प्रकट हुई हैं| इसलिए यह असीमित सृष्टि शिव का नृत्य है – “शिव तांडव”; वह चेतना जो परमानन्द, मासूम, सर्वव्यापी है और वैराग्य प्रदान करती है, वह शिव है|

शिवरात्रि पर -2 Read More »

शिवरात्रि पर -1

शिवरात्रि ही क्यों? शिव दिन क्यों नहीं ? रात्रि का अर्थ वह जो आपको अपनी गोद में लेकर सुख और विश्राम प्रदान करे | रात्रि हर बार सुखदायक होती है, सभी गतिविधियां ठहर जाती हैं, सब कुछ स्थिर और शांतिपूर्ण हो जाता है, पर्यावरण शांत हो जाता है, शरीर थकान के कारण निद्रा में चला

शिवरात्रि पर -1 Read More »

Scroll to Top