Religion and Philosophy

मन

मन : इंसान की सबसे बड़ी भूल एक ये भी है कि उसको अपनी शारिरिक क्षमताओं का आभास और स्वीकार तो होता है ,  लेकिन मानसिक क्षमताओं का न आभास होता है न स्वीकार । जैसे प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक शक्ति की अपनी एक क्षमता है ऐसे ही मानसिक शक्ति की क्षमता है । और […]

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श्री गणेश जी

श्री गणेश जी सर्वस्वरूप, परात्पर परब्रह्‌म साक्षात्‌ परमात्मा हैं । गणेश शब्द का अर्थ है जो समस्त जीव-जाति के “ईश” अर्थात्‌ स्वामी हैं । धर्मपरायण भारतीय जन वैदिक एवं पौराणिक मंत्रों द्वारा अनादि काल से इन्हीं अनादि तथा सर्वपूज्य भगवान गणपति की पूजा करते आ रहे हैं । हृदय से उपासना करने वाले भक्‍तों को

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शिवत्व

ब्रह्मांड की जो टोटल एटर्नल इंटर्नल एनर्जी है या रैंडमनैस या एंट्रापी है ..आप ग्रे मैटर भी कह सकते हैं , वही शिव है जिसका सिंबोलिक मैनिफैस्टेशन शिवलिंगम् है.. सत्य आराध्य तो है किंतु वह शिवम के साथ संयुक्त होकर ही सुन्दर बन पाता है.. शिवम् = शिव और अहम् । अर्थात मैं शिव हूँ

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नवागुंजारा

भगवान नवागुंजारा Navagunjara : यह कहानी महाभारत से है। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन एक जंगल मे ध्यान योग कर रहे थे। तभी उनके सामने एक अजीब सा जीव आया जो नौ जीवों का मिश्रण था। वो तीन पैरों पर खड़ा था। उसका एक पैर  हाथी का था, दूसरा पैर चीता का औऱ तीसरा घोड़े का और

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नवरात्रि

नवरात्र ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। काली, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-गुण के तीन आयामों के प्रतीक हैं। वे अस्तित्व के तीन मूल गुणों-तमस, रजस और सत्व के भी प्रतीक हैं। तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोड़कर विलीन होना है, पिघलकर

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अनाहिता Anahita

अनाहिता Anahita  अनाहिता का अर्थ होता है – किसी का अहित न करने वाली , निर्दोष , बेदाग , सुंदर  देवी के 1008 नामों में एक नाम अनाहिता भी है  सायरस मिस्त्री की दुर्घटनाग्रस्त हुई कार को चला रही महिला का नाम डॉ अनाहिता पंडोले था । मॉडल व टीवी ऐक्ट्रेस अनाहिता भूषण का नाम

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हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है ?

एक बड़े नेता बोले है कि हिन्दू शब्द का अर्थ बहुत गंदा है , शर्मनाक है … हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है ? हमें बचपन से पढाया गया है कि प्राचीन ईरानी पारसी व ग्रीक “स“ को “ह“ बोलते थे . इस कारण वे सिन्धु नदी को हिन्दू बोलते थे . उनके  उच्चारण दोष

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नौ रात्रि व नौ दुर्गा

नौ रात्रि व नौ दुर्गा –  सांख्य  ( सूत्र -रागविराग योग: सृष्टि) के अनुसार प्रकृति, विकृति और आकृति इन तीन का सृष्टिक्रम होता है। पदार्थों में निविष्ट मूल तीन गुणों सत-रज-तमस को आज के विज्ञान के अनुसार पॉजिटिव,  न्यूट्रल और  निगेटिव गुणों के रूप में व्याख्यायित कर सकते है। इन गुणों का आपसी गुणों के

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नववर्ष पर

समय के पृष्ठ पर भविष्य का आलेख है- नववर्ष। इसलिए हमें संकल्प की स्याही और कर्म की कलम से समय के पृष्ठ पर सृजन की इबारत लिखना चाहिये। मुंह से निकली हुई बात और हाथ से निकला हुआ समय वापस नहीं आता। अत: उक्ति और युक्ति समय के तराजू पर संतुलित होना चाहिये। वास्तविकता तो

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सहज बनिये, सरल बनिये

यदि आप सरल हैं, सहज हैं, आनंद से भरे हैं तो यह गुण संभाल कर रखिए। और जिनको ऐसे सम्बन्धी, सहकर्मी या मित्र मिले हैं उन्हें सहेज कर रखिए। आप नहीं जानते कि आपके लिए जाने-अनजाने यह अमृत कलश के समान हैं जो तमाम कटुता और दुःख के प्रभाव को मिटाकर आपको प्रेम और शांति 

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