Ashok Tiwari

19 वीं शताब्दी की तीन भारतीय स्त्रियां

19 वीं शताब्दी की तीन भारतीय स्त्रियां पहली लड़की वह थी, जो मात्र इक्कीस वर्ष में चल बसी, और उन्हें जॉन कीट्स के समकक्ष कहा गया। मैंने उनकी विष्णु पुराण पर लिखी दो अंग्रेज़ी कविताएँ पढ़ी। यह नहीं कह सकता कि वह कीट्स के कितनी करीब थी, लेकिन इक्कीस वर्ष के जीवन में असाधारण बहुत […]

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यजुर्वेद में गणितीय चमकम

कृष्ण यजुर्वेद के अंतर्गत आने वाले चमकम् का एकादश अनुवाक अत्यंत प्रसिद्ध है। इसमें साधक अंत में संख्याओं के माध्यम से पूर्णता, समृद्धि, विस्तार और ब्रह्मांडीय संतुलन की कामना करता है। यह अनुवाक इस प्रकार है: “एका च मे तिस्रश्च मे पञ्च च मे सप्त च मे नव च मे ।एकादश च मे त्रयोदश च

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वेदों में “ऋत”

वेदों में “ऋत” : अर्थ, उपयोगिता और दार्शनिक विवेचना वैदिक साहित्य में “ऋत” एक अत्यंत गूढ़ और केंद्रीय दार्शनिक अवधारणा है। यह केवल एक शब्द या धार्मिक विचार नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की व्यवस्था, संतुलन और सत्य का मूल सिद्धांत है। भारतीय दर्शन में जिस प्रकार “ब्रह्म”, “सत्य” और “धर्म” को आधारभूत तत्व माना गया

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संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Rick Briggs)

संस्कृत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Rick Briggs) — NASA के वैज्ञानिक Dr.Rick Briggs के प्रसिद्ध पेपर “Knowledge representation in Sanskrit and Artificial Intelligence” का सारांश प्रस्तुत है, जिसमें विशेष रूप से संस्कृत भाषा की विशेषताएँ और उसकी उपयोगिता को विस्तार से समझाया गया है। (2) स्पष्ट कारक प्रणाली (Case System)संस्कृत में 8 कारक होते हैं: कर्ता

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फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन

फ्रीक्वेंसी: अस्तित्व की अनसुनी धड़कन जब हम “फ्रीक्वेंसी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर विज्ञान की किसी किताब या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की याद आती है। लेकिन यदि थोड़ा ठहरकर देखें, तो महसूस होता है कि फ्रीक्वेंसी केवल एक भौतिक माप नहीं, बल्कि अस्तित्व की एक गहरी, सर्वव्यापी भाषा है। यह वही अदृश्य लय है जो सूक्ष्म

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ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ

ईश्वर की तीन शक्तियाँ: अन्तरंगा, बहिरंगा और तटस्थ भारतीय दर्शन में ईश्वर को केवल एक सर्वशक्तिमान सत्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि चेतना, शक्ति और व्यवस्था के मूल स्रोत के रूप में समझा गया है। वेदांत, उपनिषद, भागवत परंपरा और वैष्णव दर्शन में ईश्वर की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए उनकी शक्तियों का विश्लेषण

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हायर डायमेंशन

उच्च-आयामी (Higher-Dimensional) स्थानों की समझ और उनके भौतिक निहितार्थ हम जिस दुनिया का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं, वह तीन स्थानिक आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) और एक समय आयाम से बनी प्रतीत होती है। लेकिन आधुनिक भौतिकी यह संकेत देती है कि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। उच्च-आयामी स्थानों की अवधारणा इसी जटिलता

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ध्यान

ध्यान को एक ऐसे आगंतुक के रूप में प्रतिपादित किया जा सकता है, जिसकी उपस्थिति को प्रत्यक्षतः नियंत्रित नहीं किया जा सकता, अपितु जिसके आगमन के लिए केवल आंतरिक अनुकूलता और प्रतीक्षारत सजगता का निर्माण किया जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि ध्यान का अनुभव उन सभी व्यक्तियों के जीवन में घटित होता रहा

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भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय

भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय (Proto-Indo-European, PIE)” को उस आदिम भाषा के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे यूरोप और एशिया की अनेक भाषाएँ विकसित मानी जाती हैं। दूसरी ओर संस्कृत को विश्व की अत्यंत प्राचीन, संरचित और वैज्ञानिक भाषा माना जाता है। कुछ विद्वानों ने यह मत प्रस्तुत किया है कि वास्तव में

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सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion: The Original – Seven Hermetic Principles लेखक Elias Rubenstein हरमेटिक सिद्धांत (Hermetic Principles) एक दार्शनिक-आध्यात्मिक परंपरा है, जिसका संबंध प्राचीन रहस्यवादी ज्ञान से माना जाता है। यह परंपरा मुख्यतः एक प्रतीकात्मक ऋषि-पुरुष Hermes Trismegistus से जोड़ी जाती है, जिन्हें यूनानी देवता Hermes और मिस्र के देवता Thoth का संयुक्त

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