Ashok Tiwari

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion

सप्ताह की पुस्तक : The Kybalion: The Original – Seven Hermetic Principles लेखक Elias Rubenstein हरमेटिक सिद्धांत (Hermetic Principles) एक दार्शनिक-आध्यात्मिक परंपरा है, जिसका संबंध प्राचीन रहस्यवादी ज्ञान से माना जाता है। यह परंपरा मुख्यतः एक प्रतीकात्मक ऋषि-पुरुष Hermes Trismegistus से जोड़ी जाती है, जिन्हें यूनानी देवता Hermes और मिस्र के देवता Thoth का संयुक्त […]

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वाक मनस संवाद

शतपथ ब्राह्मण में “वाक्–मनस् संवाद” (1/4/5/89/13) शतपथ ब्राह्मण में “वाक् (speech)” और “मनस् (mind)” के बीच एक दार्शनिक संवाद का उल्लेख मिलता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य के ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया में मन और वाणी का क्या संबंध है और कौन अधिक महत्वपूर्ण है। यह संवाद केवल भाषिक या

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गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता

गणित की प्रासंगिकता व उपयोगिता- गणितज्ञानविहीनो यः सर्वशास्त्रेषु पण्डितः।स न पण्डित इत्युक्तो दीपहीनगृहं यथा॥(आर्यभट्टीय)अर्थजो व्यक्ति अन्य शास्त्रों का पण्डित है लेकिन गणित नहीं जानता, वह ऐसा है जैसे दीपक के बिना घर, अर्थात उसका ज्ञान अधूरा है। यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।तद्वद् वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥(भास्कराचार्य कृत सिद्धान्तशिरोमणि (लीलावती), मंगलाचरण)अर्थजैसे मोरों में शिखा और

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निर्णय व अनुभव

जीवन में घटने वाली कोई भी घटना वास्तव में निरर्थक नहीं होती। मनुष्य प्रायः अपने अतीत के कुछ निर्णयों या संबंधों को देखकर यह सोचता है कि उसने अपना समय, ऊर्जा या विश्वास व्यर्थ कर दिया। परंतु दार्शनिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक अनुभव मनुष्य के व्यक्तित्व-निर्माण की एक आवश्यक कड़ी होता है। मनुष्य

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माइंड मैटर फिजिक्स

Mind–Matter Physics ब्रायन जोसेफसन कौन हैं ? Brian David Josephsonब्रिटेन के प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं। सन 1973 में उन्हें Nobel Prize in Physics मिला। उन्होंने Josephson Effect की खोज की, जो सुपरकंडक्टर भौतिकी में महत्वपूर्ण सिद्धांत है। वे लंबे समय तक University of Cambridge के Cavendish Laboratory में प्रोफेसर रहे। नोबेल पुरस्कार मिलने के

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महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता

महावीर स्वामी का दर्शन: अन्य जैन तीर्थंकरों से भिन्नता महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर थे। यद्यपि जैन धर्म की मूल शिक्षाएँ आदि तीर्थंकरों द्वारा दी गई थीं, परंतु महावीर स्वामी ने उन सिद्धांतों को एक नई दिशा और स्पष्टता प्रदान की। उन्होंने न केवल जैन दर्शन को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत

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संस्कृत भाषा की विशेषता- 1

संस्कृत भाषा के विद्यार्थी के रूप में मुझे यह अनुभव हुआ कि वास्तव में, संस्कृत केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना को ऊर्ध्वगामी बनाने का एक सशक्त साधन है। “संस्कृत भाषा, मानव चेतना को ऊपर उठाने की भाषा है”—यह विचार भारतीय ज्ञान परंपरा के गहरे अनुभव से उपजा है। संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता

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नया वर्ष और सामायिक पथचिन्ह

नया वर्ष और सामायिक पथचिन्हTaking a New year resolutionनए साल का संकल्प सामयिक पथचिन्ह (Temporal Landmarks) वे खास समय-बिंदु होते हैं जो हमारी सोच, आदतों और निर्णय लेने की क्षमता को नया ढंग देते हैं। ये वे क्षण हैं जहाँ हम अपने जीवन को “पहले” और “बाद” में बाँटते हैं। इसी कारण इन्हें प्रेरणा, लक्ष्य-निर्धारण

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वाणी के चार स्तर

जो आप बोलते हैं आपकी वाणी (वाक्) के चार स्तर: वैखरी, मध्यमा, पश्यन्ती और परा होते हैं भारतीय दर्शन में वाणी को केवल बोलने की क्रिया नहीं माना गया है, बल्कि उसे चेतना की गहरी प्रक्रिया के रूप में समझा गया है। शब्द बाहर निकलने से पहले कई सूक्ष्म स्तरों से होकर गुजरता है। तंत्र,

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त्रिशूल : एक दार्शनिक विवेचना

त्रिशूल : एक दार्शनिक विवेचना त्रिशूल भगवान शिव का केवल आयुध नहीं है, बल्कि वह भारतीय दार्शनिक चिन्तन का गहन प्रतीक है। यह सृष्टि, जीवन और चेतना के उन मूल सिद्धान्तों को अभिव्यक्त करता है जिन पर वैदिक और शैव दर्शन आधारित है। वेदान्त और सांख्य दर्शन के अनुसार सम्पूर्ण प्रकृति तीन गुणों से बनी

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