Forgotten Heroes

सभ्यताओं का संघर्ष:

सभ्यताओं का संघर्ष: जब विचारधाराएँ कॉकपिट तक पहुँच जाती हैं- अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक सैमुएल पी. हंटिंग्टन की प्रसिद्ध पुस्तक The Clash of Civilizations and the Remaking of World Order ने 1996 में विश्व राजनीति को देखने का एक प्रभावशाली सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनका मूल तर्क था कि शीतयुद्ध के बाद दुनिया में संघर्ष केवल राष्ट्रों

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वैज्ञानिक इरावती कर्वे

वैज्ञानिक इरावती कर्वे: जब वैज्ञानिक तथ्यों ने नस्लीय श्रेष्ठता के सिद्धांत को चुनौती दी वर्ष 1928 में, भारत की एक 22 वर्षीय युवती मानवशास्त्र (Anthropology) का अध्ययन करने के लिए बर्लिन पहुँची। वह यूरोप के उन प्रमुख संस्थानों में से एक में शोध करने आई थी, जहाँ मानव नस्लों के वर्गीकरण और उनकी कथित श्रेष्ठता-अश्रेष्ठता

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एक मुट्ठी अनाज और बड़ा संकल्प

🌱 एक मुट्ठी अनाज और बड़ा संकल्प गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा जब समाज में जनजागरण और रचनात्मक कार्यों के लिए निकला करते थे, तब उनके पास साधन बहुत सीमित थे। वे लोगों से कहते थे कि बड़े परिवर्तन के लिए बड़े साधनों की नहीं, बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है। एक बार किसी व्यक्ति ने

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चेवांग नोरफेल

चेवांग नोरफेल भारत के उन महान नवप्रवर्तकों में से हैं जिन्होंने विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की सबसे बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए किया। उन्हें “आइस मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है। वे लद्दाख के एक सिविल इंजीनियर हैं, जिन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा अभिनव कार्य किया जिससे

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चिमाजी अप्पा

भारतीय इतिहास से भुलाया गया एक वीर योद्धा :चिमाजी अप्पा मराठा साम्राज्य के उन महान सेनानायकों में से थे जिनका योगदान भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे प्रसिद्ध पेशवा बाजीराव प्रथम के छोटे भाई थे। उनका जन्म सन् 1707 में हुआ था। उनके पिता बालाजी विश्वनाथ मराठा साम्राज्य के प्रथम पेशवा थे।

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19 वीं शताब्दी की तीन भारतीय स्त्रियां

19 वीं शताब्दी की तीन भारतीय स्त्रियां पहली लड़की वह थी, जो मात्र इक्कीस वर्ष में चल बसी, और उन्हें जॉन कीट्स के समकक्ष कहा गया। मैंने उनकी विष्णु पुराण पर लिखी दो अंग्रेज़ी कविताएँ पढ़ी। यह नहीं कह सकता कि वह कीट्स के कितनी करीब थी, लेकिन इक्कीस वर्ष के जीवन में असाधारण बहुत

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डॉ. अमल कुमार रायचौधुरी

स्टीफन हॉकिंग विश्व के बहुत बड़े वैज्ञानिक माने जाते हैं, जबकि बहुत कम लोग जानते है कि उनकी अधिकतर खोजो की नींव एक भारतीय वैज्ञानिक की खोज पर टिकी है । कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कालेज के प्रोफेसर डॉ रायचौधुरी (जन्म 1923 – मृत्यु 2005) वो अनजाने भारतीय वैज्ञानिक हैं जिनके कंधों पर खड़े होकर हॉकिंग

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नीरा आर्या

नीरा आर्या भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी थीं, जो आज़ाद हिंद फौज की पहली महिला गुप्तचर (जासूस) थीं। उनका जन्म 5 मार्च 1902 को हैदराबाद, तेलंगाना में हुआ था। उनके पिता सेठ चुन्नीलाल बड़े व्यवसायी थे। नीरा जी की शादी ब्रिटिश सरकार के वफादार एक पुलिस इंस्पेक्टर श्रीनिवास आर्या से हुई थी। स्वतंत्रता संग्राम में

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तेलगु रामायण लिखने वाली महान कवियित्री मोल्ला

तेलगु रामायण लिखने वाली महान कवियित्री मोल्ला  मोल्ला, जिन्हें मोल्ला तुलसी या मोल्ला कवयित्री के नाम से भी जाना जाता है, 14वीं शताब्दी की एक प्रसिद्ध तेलुगु कवयित्री थीं। उनका जन्म आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के एक छोटे से गांव कवुरु में हुआ था। मोल्ला का जन्म एक साधारण गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ,

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आचार्य विनोबा भावे

 आचार्य विनोबा भावे का आध्यात्मिक दृष्टिकोण गहराई से गांधीवादी आदर्शों और भारतीय दर्शन से प्रेरित था। वे अहिंसा, सत्य, और आत्मशुद्धि के सिद्धांतों में विश्वास करते थे। उनका मानना था कि आत्मा की शुद्धता और व्यक्तिगत विकास ही समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। विनोबा का दृष्टिकोण यह था कि आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत

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