Ashok Tiwari

स्माल मॉड्यूलर रिएक्टर

AI और Data Centres के लिए Small Modular Reactors: विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा का नया विकल्प Artificial Intelligence और data centres के तेजी से विस्तार के कारण बिजली की मांग में असाधारण वृद्धि हो रही है। IEA के अनुसार, दुनिया के data centres की बिजली खपत 2024 के लगभग 460 TWh से बढ़कर 2030 तक […]

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लाखों छोटे ऊर्जा संसाधनों से बनेगा वर्चुअल पावर प्लांट

लाखों छोटे ऊर्जा संसाधनों से बनेगा वर्चुअल पावर प्लांट भविष्य की विद्युत व्यवस्था केवल बड़े ताप विद्युत, जल विद्युत या परमाणु संयंत्रों पर आधारित नहीं होगी। आने वाले समय में घरों की सौर ऊर्जा प्रणालियाँ, बैटरियाँ, इलेक्ट्रिक वाहन, व्यावसायिक भवन, कारखाने और डेटा सेंटर भी बिजली व्यवस्था के सक्रिय भाग बन सकते हैं। इन्हीं लाखों

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रिश्ते चट्टान की तरह अडिग हों

जीवन में रिश्तों की मजबूती ही व्यक्ति को सबसे कठिन परिस्थितियों में संभालती है। सुख के दिनों में हमारे आसपास बहुत लोग होते हैं, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में वही रिश्ते हमारे साथ खड़े रहते हैं, जिनकी नींव विश्वास, प्रेम और प्रतिबद्धता पर बनी होती है। इसलिए रिश्ते चट्टान की तरह अडिग होने चाहिए। चट्टान हमें

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आचार्य श्रीराम शर्मा

आचार्य श्रीराम शर्मा (Acharya Shriram Sharma) को उनके अनुयायी केवल एक संत या आध्यात्मिक गुरु के रूप में नहीं, बल्कि युग-निर्माता और विचार-क्रांति के प्रवर्तक के रूप में देखते हैं। उनकी कुछ ऐसी विशिष्ट देनें मानी जाती हैं जो उन्हें अनेक पूर्ववर्ती आचार्यों से अलग पहचान देती हैं। पूर्वकाल के अधिकांश आचार्यों ने अध्यात्म, भक्ति

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मंत्र दृष्टा

वैदिक ऋषियों को मंत्र दृष्टा कहा जाता है , किंतु मंत्र तो शब्द ध्वनि है जिसे सुना जा सकता है । ऋषियों ने मंत्र को कैसे देखा ? भारतीय दर्शन, विशेषकर वेद, उपनिषद, तंत्र और योग परंपरा में शब्द (वाणी) को केवल ध्वनि नहीं माना गया है, बल्कि उसे ब्रह्म की अभिव्यक्ति माना गया है।

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क्वांटम कम्प्यूटर व वैदिक गणित

प्रसिद्ध पत्रिका NATURE में प्रकाशित IBM के वैज्ञानिक नूरलल्लाह ज़ाहिद और मोहम्मद मोसलेह की रिपोर्ट- Synthesis of a reversible quantum Vedic multiplier on IBM quantum computers के कुछ बिंदु – डिजिटल परिपथों में गुणा (Multiplication) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। भारतीय वैदिक गणित में वर्णित ऊर्ध्व-तिर्यक्भ्याम् (Urdhva-Tiryakbhyam) सूत्र पर आधारित Vedic Multiplier अपनी गति और

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यथा दृष्टिः तथा सृष्टिः

यथा दृष्टिः तथा सृष्टिः : चेतना, वेदान्त और पर्यवेक्षक की भूमिका भारतीय वेदान्त दर्शन का एक अत्यंत गूढ़ और महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है, “यथा दृष्टिः तथा सृष्टिः”, अर्थात् जैसी हमारी दृष्टि होती है, वैसी ही हमें सृष्टि दिखाई देती है। यहाँ दृष्टि का अर्थ केवल आँखों से देखने की क्षमता नहीं है, बल्कि मन, बुद्धि, संस्कार,

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Michio Kaku की Hyperspace

सप्ताह की पुस्तक –Michio Kaku की Hyperspace : अध्याय 1 : Worlds Beyond Space and Time (स्थान और समय से परे संसार)-पुस्तक के आरम्भ में मिचियो काकु यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या हमारी इंद्रियाँ वास्तव में सम्पूर्ण वास्तविकता का अनुभव करती हैं। वे एक ऐसे काल्पनिक संसार का उदाहरण देते हैं जिसमें केवल दो

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भाग्य का पुनर्लेखन

भाग्य का पुनर्लेखन कीजिये भाग्य को सामान्यतः एक ऐसी शक्ति के रूप में देखा जाता है जो जन्म के साथ ही निश्चित हो जाती है और जिसे मनुष्य बदल नहीं सकता। किंतु भारतीय दर्शन, उपनिषदों, गीता, योग और अनेक आध्यात्मिक परंपराओं में भाग्य को एक गतिशील प्रक्रिया माना गया है, न कि एक स्थिर और

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सिंथेटिक AI

क्या वास्तव में Synthetic AI, Artificial Intelligence से आगे है? पिछले कुछ वर्षों में Artificial Intelligence (AI) ने दुनिया को बदल दिया है। लेकिन आज एक नया शब्द तेजी से सुनाई देने लगा है—Synthetic Intelligence (SI)। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आज के अधिकांश AI मॉडल, जैसे बड़े भाषा मॉडल, उपलब्ध डेटा से

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