भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय
भाषाविज्ञान के इतिहास में “प्रोटो-इंडो-यूरोपीय (Proto-Indo-European, PIE)” को उस आदिम भाषा के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे यूरोप और एशिया की अनेक भाषाएँ विकसित मानी जाती हैं। दूसरी ओर संस्कृत को विश्व की अत्यंत प्राचीन, संरचित और वैज्ञानिक भाषा माना जाता है। कुछ विद्वानों ने यह मत प्रस्तुत किया है कि वास्तव में […]
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