जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोय तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल॥ – संत कबीर
इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति आपके साथ बुरा करे या आपकी राह में मुश्किलें पैदा करे, आपको उसके साथ भी भलाई और अच्छा व्यवहार ही करना चाहिए।
दोहे का अर्थ और संदेश-
अच्छाई का फल: जो लोग दूसरों के लिए अच्छा करते हैं, उन्हें जीवन में हमेशा सुख और प्रेम (फूल) ही मिलते हैं।
कर्म का सिद्धांत: हमारी बुराई करने वाले को उसके कर्मों का फल त्रिशूल की तरह चुभने वाले कष्टों (दुख) के रूप में खुद-ब-खुद मिल जाता है। शारीरिक मानसिक व आत्मिक कष्टों के रूप में ।

सहिष्णुता: हमें दूसरों की देखा-देखी बुरा के साथ बुरा नहीं बनना चाहिए, बल्कि अपने अच्छे स्वभाव को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।


