Forgotten Heroes

विलक्षण गुण-संपन्न राहुल बनर्जी

A Student time Prodigy  छात्र जीवन से ही विलक्षण गुण-संपन्न राहुल बनर्जी Rahul Banerjee   जनवरी 1980 में दो विदेशी वैज्ञानिक ( एक जर्मन व एक ब्रिटिश) कुछ उपकरणों को लादे हुए रीवा इंजीनियरिंग कालेज में आये और पूछ रहे थे कि हमे प्रोफेसर राहुल बनर्जी से मिलना है । प्रिंसिपल साहब बोले इस नाम का […]

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वैज्ञानिक जानकी अम्माल , जिन्हें देश ने भुला दिया

महिला वैज्ञानिक जानकी अम्माल , जिन्हें देश ने भुला दिया  विश्व की प्रथम महिला जिन्होंने बॉटनी में D.Sc. किया ।  डॉ जानकी का जन्म केरल के त्रिसूर में 1897 को हुआ । आपने क्वीन मैरी कालेज से बीएससी, मद्रास प्रेसिडेंसी कालेज से एमएससी की । फिर स्कॉलरशिप प्राप्त कर अमेरिका गयी वहां क्रोमोसोम और हाइब्रिड

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होमी जहाँगीर भाभा

होमी जहांगीर भाभा वह नाम है, जिसने हिंदुस्तान के परमाणु कार्यक्रम को बुलंदियों पर ले जाने का सपना देखा था। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिसके चलते भारत आज विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की कतार में पूरी शान से खड़ा है।मुंबई में 30 अक्टूबर 1909 को

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वैज्ञानिक विभा चौधरी

एक और महिला वैज्ञानिक जिसे हमने भुला दिया : विभा चौधरी Bibha Choudhary  परमाणु के नाभिक में एक कण होता है जिसे मेसॉन (meson) कहते है , मेसॉन की परिकल्पना जापानी वैज्ञानिक युकावा ने 1934 में की थी । किंतु युकावा की खोज पूरी तरह से सैद्धान्तिक व गणितीय थी । क्या आप जानते है

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महान क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार

महान क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार प्रीतिलता वादेदार का जन्म 5 मई 1911 को तत्कालीन पूर्वी भारत (और अब बांग्लादेश) में स्थित चटगाँव के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता नगरपालिका के क्लर्क थे। वे चटगाँव के डॉ खस्तागिर शासकीय कन्या विद्यालय की मेघावी छात्रा थीं। उन्होंने सन् 1928 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी

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कोमाराम भीम

कोमाराम भीम  कोमाराम भीम एक महान भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे।  जिन्होंने अपने जीवन काल में हैदराबाद शहर को मुक्त करने के लिए असफजली निज़ाम राजवंश के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ी। महापुरुष भीम का जन्म तेलंगाना राज्य के जोदेघाट जिले में अलिदाबाद के जंगलो में स्थित गोंडा आदिवासी समुदाय में 22 अक्टूबर 1901 को हुआ

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क्रांतिकारी मर्दन सिंह बुंदेला

क्रांतिकारी मर्दन सिंह बुंदेला  22 जुलाई : आज इनकी पुण्यतिथि है  ललितपुर रियासत के महाराज मर्दन सिंह बुंदेला ने अंग्रेजों की दासता स्वीकार नही की । वे अपनी जन्मभूमि की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजो से संघर्ष करते रहे । 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने झांसी की रानी , तात्याटोपे व नाना साहब का साथ

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स्वतंत्रता सेनानी सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू

महान स्वतंत्रता सेनानी सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू ने आज के दिन ही 1855 में  अंग्रेजो के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन किया ; 30 जून 1855 को वर्तमान झारखण्ड राज्य के साहेबगंज जिले के भगनाडीह गांव से प्रारंभ हुए इस विद्रोह के मौके पर सिद्धू ने घोषणा की थी-‘करो या मरो’, ‘अंग्रेजो हमारी माटी छोड़ो’।

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क्रांतिकारी बालिका मैनावती

1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानायक नाना साहिब की सुपुत्री मैनावती की करुण कथा को इतिहासकारों ने गायब कर दिया है , नानासाहब को न दूंढ पाने से क्रोधित पिशाचमूर्ति अंग्रेज़ों ने भीड़ के सामने खम्भे से बाँधकर जीवित जला दिया था।  इस घटना के अगले दिन यह हृदयविदारक घटना ‘बाखर’ में प्रकाशित हुई

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क्रांतिवीर संगोली रायण्णा

क्रांतिवीर संगोली रायण्णा तारीखों का संयोग देखिए – जन्म 15 अगस्त 1798 फांसी 26 जनवरी 1831 वनवासी समाज के वीर रायण्णा कित्तूर की रानी चेन्नमा के सेनापति थे । अंग्रेजों को देश से निकालने के लिए ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरूद्ध कर्नाटक में 1824 में वनवासियों की सेना बना कर गुरिल्ला युद्ध प्रारंभ किया ।

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