शहादत का सप्ताह

तेग साचो, देग साचो, सूरमा सरन साचो, 
साचो पातिसाहु गुरु गोबिंद सिंह कहायो है।
माता गुजरी तथा साहिबजादों 
अजित सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फ़तेह सिंह
के शहादत का सप्ताह है दिसंबर का आखिरी सप्ताह ।
चमकौर के भयानक युद्ध में गुरुजी के दो बड़े साहिबजादे सवा लाख मुगल फौज को धूल चटाते हुए शहीद हो गए। जिनमें बड़े साहिबजादे अजीत सिंह की उम्र महज 17 वर्ष, साहिबजादा जुझार सिंह की उम्र 15 वर्ष थी। गुरुजी ने अपने हाथों से उन्हें शस्त्र सजाकर मैदाने जंग में भेजा था। इस भयानक युद्ध में दोनो बड़े साहिबजादे शहीद हो गए। 
उधर माता गुजरीजी, छोटे साहिबजादे जोरावर सिंघ जी उम्र 7 वर्ष, और साहिबजादा फतेह सिंह जी उम्र 5 वर्ष को गिरफ्तार कर सरहंद के नवाब वजीर खां के सामने पेश किया गया। जहां उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा गया, लेकिन साहिबजादों ने कहा कि हर मनुष्य को अपना धर्म मानने की पूरी आजादी हो। जिससे नाराज वजीर खां ने उन्हें दीवारों में चुनवा दिया। मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए दोनो गुरु पुत्रों ने बलिदान दिया।
साहिबजादों की शहादत के बाद गुरु माता ने वाहेगुरु का शुक्रिया अदा कर अपने प्राण त्याग दिए। तारीख 26 दिसंबर गुरु गोबिन्द सिंह जी के संपूर्ण परिवार के बलिदान के कारण सुनहरी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। गुरु जी ने कहा था कि चार पुत्र और परिवार नहीं रहा तो क्या हुआ? मुझे खुशी है, ये हजारों सिख जीवित हैं, जो मेरे लिए मेरे पुत्रों से बढ़कर हैं।

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