🌱 एक मुट्ठी अनाज और बड़ा संकल्प
गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा जब समाज में जनजागरण और रचनात्मक कार्यों के लिए निकला करते थे, तब उनके पास साधन बहुत सीमित थे। वे लोगों से कहते थे कि बड़े परिवर्तन के लिए बड़े साधनों की नहीं, बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है।
एक बार किसी व्यक्ति ने उनसे पूछा,
“इतने बड़े काम के लिए आपके पास धन और साधन कहाँ हैं?”
आचार्य जी ने सहज भाव से कहा,
“जब उद्देश्य महान हो और नीयत साफ हो, तो साधन स्वयं जुटने लगते हैं। आवश्यकता केवल यह है कि हम अपनी छोटी-सी शक्ति को भी व्यर्थ न जाने दें।”
वे लोगों को समझाते थे कि जिस प्रकार एक-एक बूँद मिलकर समुद्र बनाती है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा सद्कार्य समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

हम अक्सर इसलिए काम शुरू नहीं करते क्योंकि हमें लगता है कि हमारे पास पर्याप्त साधन नहीं हैं। आचार्य श्रीराम शर्मा का जीवन सिखाता है कि साधनों की प्रतीक्षा मत कीजिए। जो कुछ आपके पास है, उसी से पहला कदम उठाइए। छोटे प्रयास ही एक दिन बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं।
