परशुराम

 सुतम् जितेन्द्रयं वेद वेतारं दुष्ट् संहारकारकम्। पित्राज्ञा पालकं चैव, कार्तवीये मदापहम्।  हैहयानां कुलान्तकं, शत वारम् नमाभ्याहम्।  विप्राय भृगुनाथाय, चिर जीवाय वाचसा।  पुरत: चतुर्वेदाय, नम: धनुर्धराय च। परशुरामाय रामाय, जामदग्न्याय तापसे।  ब्रह्मदेवाय देवाय, रेणुका सूनवे नम:।  दारिद्र दु:खहन्तारं दातारं सुख सम्पदाम्।  परशुरामं महावीरं, भूयो भूयो नमाभ्याहम्। ‘परशु’ प्रतीक है पराक्रम का। ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातन […]

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