स्पेस और टाइम (दिक और काल)
स्पेस और टाइम (दिक और काल): “स्थानम् कालः च ब्रह्मणि एव स्थितौ स्तः।”“स्थानकालौ ब्रह्मणि निलीयेताम्।” (वृहस्पतिजातक) अर्थात स्थान और काल ब्रह्म के अंदर ही समाविष्ट हैं । आधुनिक भौतिकी में स्पेस-टाइम (दिक-काल) एक ऐसा ढाँचा है जिसमें स्थान और समय दो अलग-अलग चीजें नहीं मानी जातीं, बल्कि एक ही संयुक्त सत्ता के रूप में समझी […]
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