ध्यान
ध्यान को एक ऐसे आगंतुक के रूप में प्रतिपादित किया जा सकता है, जिसकी उपस्थिति को प्रत्यक्षतः नियंत्रित नहीं किया जा सकता, अपितु जिसके आगमन के लिए केवल आंतरिक अनुकूलता और प्रतीक्षारत सजगता का निर्माण किया जा सकता है। इतिहास साक्षी है कि ध्यान का अनुभव उन सभी व्यक्तियों के जीवन में घटित होता रहा […]









